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जु॒हु॒रे वि चि॒तय॒न्तोऽनि॑मिषं नृ॒म्णं पा॑न्ति। आ दृ॒ळ्हां पुरं॑ विविशुः ॥२॥

अंग्रेज़ी लिप्यंतरण

juhure vi citayanto nimiṣaṁ nṛmṇam pānti | ā dṛḻhām puraṁ viviśuḥ ||

मन्त्र उच्चारण
पद पाठ

जु॒हु॒रे। वि। चि॒तय॑न्तः। अनि॑ऽमिषम्। नृ॒म्णम्। पा॒न्ति॒। आ। दृ॒ळ्हाम्। पुर॑म्। वि॒वि॒शुः॒ ॥२॥

ऋग्वेद » मण्डल:5» सूक्त:19» मन्त्र:2 | अष्टक:4» अध्याय:1» वर्ग:11» मन्त्र:2 | मण्डल:5» अनुवाक:2» मन्त्र:2


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स्वामी दयानन्द सरस्वती

फिर उसी विषय को कहते हैं ॥

पदार्थान्वयभाषाः - जो (अनिमिषम्) दिन-रात्रि (चितयन्तः) बोध कराते हुए (वि) विरुद्ध (जुहुरे) कुटिलता करते और (नृम्णम्) धन की (पान्ति) रक्षा करते हैं, वे (दृळ्हाम्) दृढ़ (पुरम्) नगर को (आ, विविशुः) सब प्रकार प्राप्त होते हैं ॥२॥
भावार्थभाषाः - जो सरल स्वभाववाले और सत्य के बोधक प्रतिक्षण पुरुषार्थ करते हैं, वे राज्य और ऐश्वर्य को प्राप्त होते हैं ॥२॥
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स्वामी दयानन्द सरस्वती

पुनस्तमेव विषयमाह ॥

अन्वय:

येऽनिमिषं चितयन्तो वि जुहुरे नृम्णं पान्ति ते दृळ्हां पुरमा विविशुः ॥२॥

पदार्थान्वयभाषाः - (जुहुरे) कुटिलयन्ति (वि) विरुद्धे (चितयन्तः) ज्ञापयन्तः (अनिमिषम्) अहर्निशम् (नृम्णम्) धनम् (पान्ति) रक्षन्ति (आ) (दृळ्हाम्) (पुरम्) नगरम् (विविशुः) आविशन्ति ॥२॥
भावार्थभाषाः - ये सरलस्वभावाः सत्यविज्ञापकाः प्रतिक्षणं पुरुषार्थयन्ते ते राज्यैश्वर्य्यं लभन्ते ॥२॥
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माता सविता जोशी

(यह अनुवाद स्वामी दयानन्द सरस्वती जी के आधार पर किया गया है।)
भावार्थभाषाः - जे सरळ स्वभावाचे, सत्यबोधक असून प्रतिक्षणी पुरुषार्थ करतात त्यांना राज्य व ऐश्वर्य लाभते. ॥ २ ॥